सूरतगढ़-फलोदी-जोधपुर-समदड़ी-भीलड़ी लाइन पर सबसे पहले दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक इंजन की ट्रेनें

पश्चिमी राजस्थान में सबसे पहले सूरतगढ़ से फलोदी, जोधपुर व भीलड़ी के रास्ते इलेक्ट्रिक इंजन की ट्रेनें दौड़ेंगी, यह तय हो गया है। रेलवे ने 902 किमी लंबे इस रूट पर बिजली लाइनें बिछाने के लिए इस साल 193 करोड़ रुपए दिए हैं। 750 करोड़ के इस प्रोजेक्ट काे रेलवे ने 2018 में मंजूरी दी थी, लेकिन तब बजट में एक रुपया नहीं दिया था। 2019 में महज एक करोड़ रुपए मिले तो इस बार करीब 30 फीसदी राशि आवंटित कर दी गई। शेष अन्य पांच प्रोजेक्ट के लिए भी राशि तो आवंटित की गई है, लेकिन वह केवल आधारभूत काम करने में ही खप जाएगी।



पिछले साल रेलवे बोर्ड की विद्युतीकृत परियोजनाओं के लिए बनाए गए अंब्रेला प्रोजेक्ट के तहत जोधपुर मंडल से जुड़ी कुल 1056 किमी लाइन के लिए 934 करोड़ के पांच प्रोजेक्ट मंजूर किए गए थे। हालांकि इन प्रोजेक्ट को शुरू होने में कुछ साल लगना तय है, लेकिन बजट कम मिलने से देरी बढ़ना भी तय था। दो साल पहले बजट में सूरतगढ़ से फलोदी, जोधपुर होकर भीलड़ी तक रेलमार्ग को विद्युतीकृत करने की 750 करोड़ की योजना मंजूर की गई। अब रेलवे ने मार्च 2021 तक इस परियोजना का काम धरातल पर लाने के लिए फंड का इंतजाम कर लिया है। केंद्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन (कोर) के मुख्य परियोजना प्रबंधक राजेश मोहन के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर किए जा रहे हैं। यह उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन का दूसरा प्रोजेक्ट है जो ईपीसी मोड पर पूरा किया जाएगा। इससे प्रोजेक्ट को तय दिनों में पूरा करने की अनिवार्यता होगी। इधर, रेलवे के अम्ब्रेला प्रोजेक्ट में शामिल किए गए बीकानेर-मेड़ता रोड-जोधपुर व फुलेरा-मेड़ता रोड (424 किमी) के लिए 30 करोड़, मारवाड़ जंक्शन-लूणी (71 किमी) के लिए 20 करोड़, रतनगढ़-डेगाना (142 किमी) 20 करोड़, समदड़ी-बाड़मेर-मुनाबाव (250 किमी) के लिए 20 करोड़, थयात हमीरा-सानू, पीपाड़ रोड-बिलाड़ा, मकराना-परबतसर सिटी व मेड़ता रोड-मेड़ता सिटी (कुल 135 किमी) रूट पर विद्युतीकरण के लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान इस साल किया गया है।


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